गर्भनाल गिरने में कितना समय लगता है?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 10:50

गर्भनाल आमतौर पर जन्म के 5 से 10 दिनों के बीच अलग हो जाती है। लेकिन कुछ शिशुओं में इसे अलग होने में तीन सप्ताह या उससे अधिक का समय लग सकता है।

गर्भनाल क्या होती है? | What Is Umbilical Cord In Hindi


गर्भनाल महिला के शरीर का वह अहम हिस्सा है, जो गर्भावस्था के समय उसे शिशु से जोड़ता है। मां द्वारा लिए जाने वाले सभी पोषण तत्व इसी नाल के जरिए बच्चे के शरीर तक पहुंचते हैं। गर्भनाल ही वह माध्यम है, जिसके सहारे शिशु गर्भ में जीवित रहता है। इस नाल से ही बच्चे को ऑक्सीजन मिलती है। गर्भनाल बच्चे के पेट से लेकर महिला की नाभि तक जुड़ी होती है। औसतन अंबिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल लगभग 50 सेमी (20 इंच) लंबी होती है (1)। गर्भनाल से जुड़ी कुछ और रोचक बातें इस प्रकार हैं :

गर्भनाल, नस और धमनियों से मिलकर बनी होती है।
नस बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाती है।
गर्भनाल सीधे शिशु के लिवर से जुड़ी होती है। ऐसे में नाल में अगर कोई संक्रमण होता है, तो बच्चे को गंभीर लिवर इंफेक्शन होने का खतरा हो सकता है।

चलिए, अब जानते हैं कि बच्चे की गर्भनाल को किस प्रकार अलग किया जाता है।
बच्चे की गर्भनाल कब और कैसे काटी जाती है?

शिशु के जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर गर्भनाल को काट देते हैं (1)। वैसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, यदि बच्चा सामान्य है और उसे किसी चिकित्सकीय सहायता की जरूरत नहीं है, तो कॉर्ड क्लैंपिंग कुछ क्षण रुककर करने की सलाह दी जा सकती है। बताया जाता है कि डिलीवरी के बाद गर्भनाल काटने के लिए डॉक्टरों को कम से कम एक मिनट तक इंतजार करना चाहिए। यह शिशु के स्वास्थ्य और पोषण के लिए जरूरी है (2)। नीचे हम बता रहे हैं कि बच्चे की गर्भनाल कैसे काटते हैं (3) (1)।

बच्चा जैसे ही जन्म के बाद सांस लेने लगता है, तो बच्चे से जुड़ी गर्भनाल को साफ और स्टेराइल यानी बैक्टीरिया मुक्त कैंची या ब्लेड की मदद से काट दिया जाता है।
काटने से पहले ब्लैड व कैंची को स्टरलाइज किया जाता है, ताकि बच्चे को किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो।
डिलीवरी के बाद शिशु को खुद से सांस लेने और पोषक तत्व के लिए गर्भनाल की जरूरत नहीं पड़ती है। यही वजह है कि इसे काट दिया जाता है।
इसे काटते वक्त दर्द भी नहीं होता है, क्योंकि इसमें कोई नर्व यानी तंत्रिका नहीं होती है।
गर्भनाल को काटने से पहले एक प्लास्टिक की क्लिप बच्चे से जुड़ी नाल को 3 से 4 cm तक लगाई जाती है और फिर दूसरी तरफ की नाल में क्लैंप को लगाया जाता है।
इन दोनों प्लास्टिक के बीच से गर्भनाल को काटा जाता है।
इसे काटने के बाद बच्चे के पेट पर 2 से 3cm (1 से 1.5in) लंबा स्टंप (बची हुई नाल) रह जाएगी। यह ठीक होने पर बच्चे की नाभि बनती है।

नोट: गर्भनाल को काटने की प्रक्रिया सिर्फ डॉक्टर व विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। इसे स्वयं से करने का प्रयास न करें।

अब हम बता रहे हैं कि गर्भनाल काटने के बाद शिशु का ख्याल कैसे रखा जाता है।
शिशु के ठूंठ की देखभाल करने के लिए सुझाव | Baby Ki Garbh Naal Ki Dekhbhal

शिशु की नाल कटने के बाद ठूंठ की देखभाल करना अहम होता है। इसकी अनदेखी करने पर बच्चे को इंफेक्शन हो सकता है। बच्चे की ठूंठ न गिरने तक किस तरह से उसकी देखभाल की जानी चाहिए, इसके लिए कुछ सुझाव हम नीचे दे रहे हैं (4) (5):

स्टंप को हर समय साफ रखें।
कॉटन के कपड़े या पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ करें।
किसी भी तरह के साबुन या अन्य पदार्थ के इस्तेमाल से बचें।
पानी का इस्तेमाल करने के बाद तुरंत स्टंप को सुखाएं या हवा में सूखने के लिए छोड़ दें।
समय-समय पर स्टंप के आस-पास चिपचिपा पदार्थ (Ooze) नजर आ सकता है, उसे साफ करते रहें।
जब तक स्टंप गिर न जाए, तब तक अपने बच्चे को पानी के टब में न नहलाएं।
इसे खींचने की कोशिश न करें, भले ही यह केवल एक धागे से ही क्यों न लटका हो।
स्टंप को स्वाभाविक रूप से गिरने दें।
स्टंप को छूने से पहले हाथ धोएं।
साथ ही कोशिश ये करें कि उसे ज्यादा न छुएं।
कॉर्ड को सूखा व हवा के संपर्क में रखें।
बच्चे को नैपी पेंट्स पहनाते समय ध्यान रखें कि वो स्टंप से नीचे ही हो। अन्यथा स्टंप में नमी बन सकती है।

अब शिशु की नाभि ठीक न हो जाने तक उसे कैसे नहलाया जा सकता है, उस बारे में जान लेते हैं।

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